ब्राजील: लूला दा सिल्वा चौथी बार राष्ट्रपति निर्वाचित

नवयुग की विशेष रिपोर्ट26 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट पढ़ें

ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी बोल्सनारो की हार 

‘नवयुग ब्यूरो’ की लैटिन अमेरिकी राजनीति पर विशेष रिपोर्ट

लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा है। मेक्सिको के बाद ब्राजील में वामपंथी विचारधारा के नजदीकी रखने वाले धड़ों की जीत ने लैटिन अमेरिकी देशों में ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव को रोक दिया है। ब्राजील में लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत का महत्त्व इसी बात में देखा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने लूला के धुर विरोधी दक्षिणपंथी फ्लावियो बोल्सोनारो को खुला समर्थन देते हुए ब्राजीली जनता से उन्हें वोट देने की अपील की थी। लूला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। उनकी जीत से लैटिन अमेरिका में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का विरोध करने वालों को राहत मिलेगी।

रियो डी जेनेरियो। लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा है। मेक्सिको के बाद ब्राजील में वामपंथी विचारधारा के नजदीकी रखने वाले धड़ों की जीत ने लैटिन अमेरिकी देशों में ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव को रोक दिया है। ब्राजील में लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत का महत्त्व इसी बात में देखा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने लूला के धुर विरोधी दक्षिणपंथी फ्लावियो बोल्सोनारो को खुला समर्थन देते हुए ब्राजीली जनता से उन्हें वोट देने की अपील की थी। लूला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। उनकी जीत से लैटिन अमेरिका में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का विरोध करने वालों को राहत मिलेगी।

चुनाव के अंतिम दिन बेहद तनावपूर्ण हालात में मतदान का समय दो घंटे के लिए निर्वाचन अदालत ने दोनों पक्षों के औपचारिक अनुरोध के बाद बढ़ाया था। सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद निर्वाचन अदालत ने नतीजे घोषित करते हुए कहा कि लूला को 51.8 फीसदी वोट मिले। उन्होंने सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से पीछे छोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि चुनाव के पहले चरण में बोल्सनारो ने 47 प्रतिशत वोट लेकर लूला पर 2 प्रतिशत वोटों की बढ़त ली थी, लेकिन चुनाव के दूसरे दौर में लूला ने ट्रंप विरोध को अपना हथियार बनाया और 51.79 प्रतिशत वोट हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लेविओ बोल्सनारो को 48.21 प्रतिशत वोट मिले। लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि बोल्सनारो इतनी आसानी से हार नहीं मानने वाले हैं, वे निर्वाचन अदालत में चुनाव के नतीजों के विरुद्ध अपील करेंगे।

जीत के बाद साओ पाउलो में समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए लूला ने कहा कि वह सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में चौथी बार उनके चुने जाने से लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने ब्राजील की जनता द्वारा चुनी गई रूढ़िवादी विचारधारा वाली कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने और देश के सभी 21.5 करोड़ नागरिकों के लिए शासन चलाने का वादा किया। लूला ने कहा कि उन्होंने अपने चुनाव अभियान ने मतदाताओं को यह समझाने में सफलता हासिल की कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान करना बेहद जरूरी है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने की भी मांग की। उनका कहना था कि ब्राजील ने इन प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले विदेशी हस्तक्षेप को नाकाम किया है। लूला ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा, ‘ब्राजील किसी की जागीर नहीं है।’

पहले चरण के मतदान के बाद बोल्सोनारो को जीत की उम्मीद थी। हार ने उन्हें नतीजों पर अंगुली उठाने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि इन नतीजों को ‘स्वीकार करना असंभव’ है। बोल्सोनारो अब चुनाव रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए उनका तर्क है कि ‘खेल के नियम बदल दिए गए थे।’ उनका इशारा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की ओर है, जिसके तहत मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया गया था।

यह फैसला असामान्य जरूर था, लेकिन इसके लिए लूला और बोल्सोनारो, दोनों के चुनावी अभियानों की टीमों ने औपचारिक रूप से अनुरोध किया था। लूला की जीत लैटिन अमेरिका में उभरते उस रुझान के विपरीत है, जिसमें दक्षिणपंथी झुकाव वाले और ट्रंप के सहयोगी उम्मीदवार चुनाव जीत रहे हैं। लूला के राष्ट्रपति बने रहने के साथ ही इस क्षेत्र के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों ब्राजील और मेक्सिको में वामपंथी झुकाव वाले नेता सत्ता में रहेंगे। इस जीत से ब्राजील अमेरिका से स्वतंत्र अपनी स्थिति बनाए रख सकेगा। ब्राजील की अर्थव्यवस्था का सालाना आकार 2.6 लाख करोड़ डॉलर है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ट्रंप ने ब्राजील पर अधिक आयात शुल्क लगाए हैं।

चुनाव नतीजों के बाद साओ पाउलो और रियो डी जेनेरियो में लोग सड़कों पर जमा हुए. लूला के चुनाव प्रचार अभियान ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह अपनी पत्नी और फर्स्ट लेडी रोजांगेला दा सिल्वा तथा सहयोगियों के साथ जीत का जश्न मनाते नजर आए। उन्होंने लाल रंग के सितारे के आकार का चश्मा पहन रखा था। इस महीने की शुरुआत में हुए पहले दौर के मतदान में बोल्सोनारो को लूला से 22 लाख से अधिक वोट ज्यादा मिले थे। एपी के मुताबिक, 1985 में सैन्य तानाशाही समाप्त होने के बाद लूला ऐसे पहले उम्मीदवार हैं, जिन्होंने पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव जीता।

मुद्दे क्या थे?

मतदाताओं के सामने महंगाई और अपराध प्रमुख चिंताएं थीं। बोल्सोनारो ने अपने चुनाव अभियान में अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था। उन्होंने खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का भी आश्वासन दिया था। वहीं, लूला ने उन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की, जिन्होंने अभी तक किसी उम्मीदवार को चुनने का फैसला नहीं किया था। उन्होंने परिवारों की मदद के लिए महंगी योजनाओं पर खर्च किया। दोनों नेताओं को अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है। बोल्सोनारो का नाम ब्राजील के एक बड़े घोटाले से भी जुड़ा रहा है।

पहले दौर के नतीजों के बाद लूला ने अपने चुनाव अभियान की रणनीति बदली। उन्होंने युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की, लोकतांत्रिक मूल्यों और अपने कार्यकाल के रिकॉर्ड के समर्थन में लाखों लोगों को सड़कों पर उतारा और बोल्सोनारो की एक और सरकार बनने के संभावित परिणामों को लेकर आगाह किया। साथ ही, उन्होंने अपनी सरकार की कई योजनाओं को आगे बढ़ाया। अमेरिकी हस्तक्षेप की आशंका ने भी लूला को मजबूती प्रदान की।

लूला की राजनीति 

यह लूला के राजनीतिक करियर की संभवतः आखिरी चुनावी जीत होगी। उन्होंने 1970 के दशक में ट्रेड यूनियन नेता के तौर पर राजनीति की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में मदद की। लूला ने इस पार्टी की ओर से तीन बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा। 2002 में उन्हें पहली बार जीत मिली और चार साल बाद वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गए। 2010 में उनकी सरकार में मंत्री रहीं डिल्मा रूसेफ ने उनकी जगह ली। रूसेफ 2014 में दूसरी बार राष्ट्रपति चुनी गईं। हालांकि, लेखा-जोखा संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर 2016 में उन्हें पद से हटा दिया गया। उस समय भ्रष्टाचार के आरोपों की एक व्यापक जांच चल रही थी, जिसमें लूला का नाम भी सामने आया था।

लूला ने 2018 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन उसी साल मार्च में एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। 580 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें रिहा किया गया। बाद में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा रद्द कर दी। इसके बाद लूला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के प्रमुख आलोचकों में शामिल हो गए। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने बोल्सोनारो को बेहद करीबी मुकाबले में हराया था। 80 साल की उम्र में लूला अब अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल हैं। इस सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ओर्तेगा भी हैं, जिनकी उम्र भी 80 साल है।    

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