अंतरराष्ट्रीय

सऊदी के महंगे हथियारों पर हूतियों के सस्ते ड्रोन भारी: 15 लाख का ड्रोन रोकने में 30 करोड़ खर्च; यमन में जीत का रास्ता मुश्किल

नवयुगनवयुग — 15 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट पढ़ें
छपे अंक में पृष्ठ 6 · वर्ष 60 अंक 9

सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा पर दशकों से अरबों डॉलर खर्च किए हैं। उसके पास आधुनिक फाइटर जेट हैं। मिसाइलों को हवा में नष्ट करने वाले महंगे सिस्टम भी हैं। सैन्य खर्च के मामले में वह दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। हूती विद्रोहियों के पास सऊदी अरब जैसी बड़ी सेना और आधुनिक हथियार नहीं हैं लेकिन उन्होंने सस्ते ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को अपनी ताकत बना लिया है। इन हथियारों का पता लगाना और उन्हें हवा में ही नष्ट करना मुश्किल होता है।

सऊदी अरब के लिए हूती विद्रोहियों के सस्ते ड्रोन रोकना महंगा सौदा साबित हो रहा है। करीब 15 लाख रुपए के एक ड्रोन को नष्ट करने के लिए 25 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। हूती विद्रोही इसका फायदा उठाकर सऊदी अरब की महंगी सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर रहे हैं।

महंगे हथियारों के सामने सस्ते ड्रोन की चुनौती सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका और यूरोपीय देशों से आधुनिक और महंगे हथियार खरीदता रहा है। इनमें अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। लेकिन हूती विद्रोहियों के हमले के आगे ये सब बेअसर हैं। वे कम कीमत वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। ये हथियार कई बार जमीन के काफी करीब उड़ते हैं। ऐसे में रडार के लिए उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

सऊदी अरब को इन हमलों को रोकने के लिए कई बार बेहद महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है। एक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 30 करोड़ होती है। इसके मुकाबले एक ड्रोन की कीमत महज 15 लाख होती है। इसका नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। महंगी मिसाइलों का भंडार भी सीमित होता है। यूक्रेन और ईरान जंग से इंटरसेप्टर मिसाइल की मांग बढ़ी यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्धों के कारण दुनियाभर में मिसाइल इंटरसेप्टर की मांग बढ़ी है।

ऐसे में सऊदी अरब के लिए लंबे समय तक इसी तरह हमलों को रोकते रहना मुश्किल हो सकता है। हूती विद्रोहियों की ताकत भी पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने अपने हथियारों के भंडार को बढ़ाया है। अब वे कुछ हथियार खुद भी बनाने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया गया है कि अब हूती ईरान के भरोसे नहीं रहे।

स्रोत: नवयुग का 15 अक्टूबर 2026 अंक, पृष्ठ 6। यह मूल मुद्रित लेख का डिजिटल पाठ है। मूल ई-पेपर पढ़ें

नवयुग