राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनाव लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर स्वशासन का मुख्य आधार हैं। भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संशोधन (अनुच्छेद 243के) के तहत राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया था, जिसे पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराने की शक्तियां सौंपी गई हैं। यह आयोग भारत निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र है और राज्य में चुनाव संपन्न कराने के लिए उत्तरदायी है।
राजस्थान में एक सदस्यीय राज्य निर्वाचन आयोग का नेतृत्व राज्य निर्वाचन आयुक्त करते हैं, जो मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव आयोजित करने का संवैधानिक दायित्व निभाते हैं। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव राज्य में 1960 से हो रहे हैं, लेकिन 1995 से इन चुनावों का संचालन स्वतंत्र रूप से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है। इसी प्रकार, शहरी निकायों के चुनाव भी आयोग के दिशा-निर्देशन में होते हैं।
राजस्थान में लोकल बॉडीज को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है—शहरी स्थानीय निकाय: इसके अंतर्गत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं आती हैं। वर्ष 2026 में प्रदेश के 309 शहरी निकायों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। पंचायती राज संस्थाएं: इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद शामिल हैं। जिला प्रमुखों और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव भी एक व्यवस्थित ढांचे के तहत संपन्न कराए जाते हैं।
चुनावों की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। आचार संहिता के दौरान सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। सार्वजनिक और निजी संपत्तियों से राजनीतिक होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर और झंडे तय समय सीमा (24 से 72 घंटे) के भीतर हटाए जाने अनिवार्य होते हैं। मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का व्यापक उपयोग किया जाता है, जिसके लिए आयोग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
स्थानीय निकाय चुनावों में समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। 2026 के चुनावों में राज्य निर्वाचन आयोग ने सीट आरक्षण के लिए रोटेशन फॉर्मूले को सख्ती से लागू किया है। इस नीति के तहत, वर्ष 2014 और 2019–20 के चुनावों में जो सीटें SC या ST वर्ग के लिए आरक्षित थीं, उन्हें इस बार की आरक्षण सूची से बाहर रखा गया है।
309 शहरी निकायों में से 188 पद अनारक्षित रखे गए हैं, जिनमें से 62 पद महिलाओं के लिए हैं। इसके अलावा SC के लिए 50 पद, ST के लिए 11 पद और OBC के लिए 60 पद आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण की यह रोटेशन व्यवस्था पुराने सियासी समीकरणों को बदलकर नए उम्मीदवारों के लिए अवसर पैदा करती है।
राजस्थान में स्थानीय निकायों के चुनाव न केवल विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने का माध्यम हैं, बल्कि यह जागरूक मतदाता जनतंत्र का प्रहरी की भावना को भी साकार करते हैं। हर पांच साल में होने वाले ये चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा और स्थानीय नेतृत्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्रोत: नवयुग का 31 अगस्त 2026 अंक, पृष्ठ 3। यह मूल मुद्रित लेख का डिजिटल पाठ है। मूल ई-पेपर पढ़ें
